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Posted on 1 September 07 क्या
मुझे कोई जांच - परीक्षण करवाने चाहिए ?
इस बीमारी की पुष्टि करवाने के लिए आमतौर पर एक
जांच-परीक्षण किया जाता है जिसे स्पायरोमेट्री कहते है |
इस जांच-परीक्षण में आपके द्वारा एक मशीन में फूंकी गई हवा
की जांच की जाती है जिसका मान आपके द्वारा कुल फूंकी गई हवा
को आपके द्वारा एक सेकेण्ड में फूंकी जा सकने वाली हवा से
विभाजित करके निकाला जाता है इसका मान कम होना इस बात की
ओर संकेत करता है कि आपकी वायु वाहिकाएं संकरी है इस निम्न
मान के साथ -साथ सीओपीडी के आम लक्षण भी मौजूद हों तो इससे
स्थिति के निदान की पुष्टि होती है |
सीओपीडी कैसे पैदा होता तथा पनपता है ?
इसके लक्षण आमतौर पर उन लोगों में देखे जाते है जिनकी उम्र
४० पार कर गयी हो तथा वे २० वर्षों या इससे ज्यादा समय से
धूम्रपान करते हो.शुरू में उनमें धूम्रपान करने वालों को
होने वाली खांसी के लक्षण दिखाई देते है लक्षण दिखाई देने
के वाद भी अगर आप धूम्रपान करते है तो स्थिति वर्ष-दर-वर्ष
.धीरे-धीरे और बिगडती जाती है | आपकी सांस फूलने और हांफने
की शिकायत बढती जाती है .वक्त के साथ छाती में जकडन अक्सर
रहती है छाती में संक्रमण होने पर ये लक्षण और भी बढ जाते
है |
बीमारी के बढने के साथ संकरी वायु वाहिकाओं के जरिए फेफडों
को पर्याप्त ऑक्सीजन नही मिल पाती है इसके फलस्वरूप रक्त
में सामान्य से कम मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचती है जिससे
ह्रदय के काम न करने की नौबत आ सकती है क्योकि ह्रदय को
ऑक्सीजन की अच्छी सप्लाई की आवश्यकता पडती है |
सीओपीडी का क्या उपचार है ?
धूम्रपान बंद कीजिए |
यह सबसे महत्वपूर्ण उपचार है अगर बीमारी के लक्षण हल्के
हैं तो शायद जिसी उपचार की आवश्यकता न पडें |
कम समय के लिए असरकारी ब्रॉन्कोडिलेटर इन्हेलर ..
अक्सर ब्रॉन्कोडिलेटर औषधि युक्त इन्हेलर का लेना
निर्धारित किया जाता है ये वायु वाहिकाओं (ब्रॉन्की) की
मांसपेशियां को यथासंभव फैला कर खोल देते है .इसके उदाहरणों
में शामिल है ..
१ बीटा एगॉनिस्ट इन्हेलर ,जैसे कि साल्बुटामोल तथा
टर्बुटाइन
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२ एंटी कॉलिनेर्जिक इन्हेलर ,जैसे कि इप्राटोपियम ,ये
इन्हेलर
कुछ लोगों पर अच्छे असरदार साबित होते है जबकि कुछ लोगों
पर उतने असरदार नही .हल्के या कभी-कभी उभरने वाले लक्षणों
से युक्त व्यक्तियों को इन्हेलर की जरूरत केवल तभी पडती है
जब सांस फूलने लगे या सांय-सांय की आवाज होने लगे कुछ लोगों
को नियमित रूप से इन्हेलर की जरूरत पडती है बीटा एगॉनिस्ट
तथा एंटीकॉलिनेर्जिक इन्हेलर अलग - अलग तरीके से काम करते
है कुछ लोगों को दोनों प्रकार के एक-एक इन्हेलर की जरूरत
पडती है जबकि कुछ लोगों के लिए सिर्फ एक प्रकार के इन्हेलर
का इस्तेमाल पर्याप्त होता है |
लम्बे समय के लिए असरकारी ब्रॉन्कोडिलेटर इन्हेलर ..
इस प्रकार के इन्हेलर्स मेंबीटा एगॉनिस्ट जैसे कि
फॉर्मोटिरॉल तथा सल्मेटेरॉल और एंटी कॉलिनेर्जिक जैसे कि
टायोट्रॉपियम शामिल है ये भी कम समय के लिए असरकारी
इन्हेलर्स की तरह ही काम करते है मगर इनकी प्रत्येक डोज
कमसे कम १२ घंटे तक असर करती है मगर कम समय के लिए असरकारी
इन्हेलर लेने के वाद भी बीमारी के लक्षण तकलीफ देते रहते
है तो इन्है विकल्प के रूप में लिया जा सकता
है |
स्टेरॉयड इन्हेलर ..
अगर आपको ज्यादा गंभीर सीओपीडी है तो ब्रॉन्कोडिलेटर
के साथ-साथ स्टेरॉयड इन्हेलर का भी इस्तेमाल करने से ज्यादा
फायदा पंहुंच सकता है स्टेरॉयड सूजन को कम करते हैं
स्टेरॉयड इन्हेलर के कई ब्राण्ड मौजूद है आपके 'आम 'लक्षणों
में स्टेरॉयड से संभव खास फायदा न पहुंचे,लकिन यह लक्षणों
को बढने से रोकने में ज्यादा मदद कर सकता है
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ऑक्सीजन
जिन लोगों के लक्षण ज्यादा बढ गये हों उन्हें ऑक्सीजन से
फायदा पहुंच सकता है, लेकिन ऑक्सीजन सभी मामलों में मदद नही
करती है विशेषज्ञ आमतौर पर कुछ स्वसन जांच -परीक्षण करके
यह तय करते है कि ऑक्सीजन से मदद मिकेगी या नही अगर यह
उपयोगी हो तो दिन में करीब १५-२० घंण्टे ऑक्सीजन लेनी पडती
है |
संक्षेप में
० अगर आप धूम्रपान जारी रखते है तो बीमारी के लक्षण और
बिगडते जाते है
० आमतौर पर धूम्रपान से सीओपीडी होता है
० धूम्रपान छोडने पर लक्षणों के बिगडने की संभावना कम होती
है
० इन्हेलर द्वारा उपचार से लक्षणों से राहत मिलती है लेकिन
किसी भी उपचार के जरिए क्षतिग्रस्त वायु वाहिकाओं को ठीक
नही किया जा सकता है
० छाती में संक्रमण होने से लक्षणों की गंभीरता बढ जाती है
जिससे स्टेरॉयड की गोलियां के अल्पावधि उपचार तथा या
एंटीबायटिक्स के द्वारा मदद मिल सकती
है |
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