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Posted on 1 September 2007 गर्मी
के दौरान अपने बच्चे के अस्थमा का सामना कैसे करें..
गर्मी के महीने बहुत से बच्चों के लिए घर के बाहर की
बहुत सी गतिविधियों को करने के दिन होते हैं लेकिन सांसों
की तकलीफ वाले कुछ बच्चों के लिए घर के बाहरकि गतिविधियों
में थोडा हेर-फेर करना पड सकता है गर्मियों के महीनों में
हवा में कुछ प्रकार के परागकणों की अधिकता होती है गर्मियों
में घास तथा खरपतवारों के परागकण अस्थमा के सबसे आम
उत्तेजक होते इन पौधों के परागकण छोटे.हल्के तथा शुष्क होते
हैं जो आसानी से हवा के झौकों के साथ एक जगह से दूसरी जगह
तक जाते हैं शुक्र है कि इस दौरान भी आप कुछ कदम उठाकर अपने
बच्चे को स्वस्थ रख सकते है
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पतझड के दौरान अपने बच्चे के अस्थमा का सामना कैसे करें
?
पतझड के दौरान वातावरण में परागकणों की मौजूदगी बहुत
बढ सकती है इस मौसम में सांस की समस्याएं भडकाने में
परागकणों का सबसे बडा हाथ होता है इन पौधों में छोटे. हल्के
तथा सूखे किस्म के परागकण पाए जाते हैं जो हवा के झौकों के
साथ आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंच जाते हैं
साल के इस समय की तकलीफें बढा सकते हैं
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एलर्जी उत्तेजकों से अपने बच्चे का सम्पर्क घटाने में
मदद के लिए ये कदम आजमाकर देखिए..
० गर्म.खुश्क.और हवादार दिनों में जब वातावरण में परागकणों
की अधिकता होती है तो अपने बच्चे को ज्यादा समय घर में रखने
की कोशिश करें खिडकियां बंद रखे अगर आप घर को ठंडा रखना
चाहते हों तो एयर कंडीशन चला लें..
० कपडों को धोकर सूखने के लिए बाहर न टांगें इन पर परागकण
चिपक सकते हैं जो बाद में कपडों को घर में लाए जाने पर
अस्थमा उत्तेजक का कार्य कर सकते हैं.
० इंटरनेट साइट्स जैसे कि www.weather.com या रेडियो या टीवी
पर स्थानीय मौसम के हाल के जरिए वातावरण में परागकणों की
मौजूदगी पर नजर रखिए.ताकि आपको पता रहे कि आपके बच्चे को
सबसे ज्यादा जोखिम कब है..
० अपने बच्चे को गिरी हुई पत्तियों के ढेर में चलने या
खेलने न दें गिरी हुई पत्तियों में अक्सर फफूंद पनपती
हैं |
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