Last Update: 1 September 2007

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बच्चों में अस्थमा के मूल कारणों को समझना...

Posted on 1 September 2007

बचपन होना चाहिए मौज-मस्ती से भरा लेकिन कई बार अस्थमा इसका मजा किरकिरा कर देता है और बच्चे की खुशियां चुरा लेता है लेकिन शुक्र है कि ऐसी औषधियां उपलब्द है जो अस्थमा के दौरों को काबू में रखने तथा इससे बचाव करने में मदद कर सकती है | विभिन्न औषधियों का इस्तेमाल किस प्रकार किया जाए तथा अपने बच्चे के अस्थमा को काबू में रखने के लिए क्या कदम उठाए जाएं.यह समझना एक मुश्किल काम साबित हो सकता है
ज्यादातर बच्चों में अस्थमा के लक्षण होते है | खांसी.सांस में सांय-सांय की आवाज तथा सांस लेने में असुविधा.ये लक्षण ठंड.मौसम में परिवर्तन .व्यायाम या सिगरेट के धुएं परागकण. फफूंद पशुओं तथा प्रदूषण के सम्पर्क में आने से पैदा या भडक सकते है | अगर आप जानते है कि किन चीजों से आपके बच्चे का अस्थमा भडकता है तो आप अपने बच्चे को बचाकर रख सकते है .निदान करने में आसानी रहती है लेकिन अस्थमा का निदान करना उस समय मुश्किल हो जाता है जब बच्चों को केवल खांसी आती हो या खांसी की स्थिति में परिवर्तन आता हो आपके बच्चे को अस्थमा होने की संभावना तब भी हो सकती है | अगर उसे पुरानी खांसी हो जो रात के समय या दौडते अथवा खेलते-कूदते समय बढ जाती हो भले ही अगर उसकी सांस से कभी भी सांय-सांय की आवाज नही आती हो |

अस्थमा के उपचार
जब आपके बच्चे को खांसी आ रही हो या सांस में सांय- सांय की आवाज आ रही हो अथवा अस्थमा की तकलीफ हो रही हो तो सबसे महत्वपूर्ण उपचार होता है ब्रॉन्कोडिलेटर का इस्तेमाल करना इन्हें झटपट आराम देनेवाली या राहतकारी औषधियॉं भी कहा जाता है इन औषधियों का इस्तेमाल जरूरत के आधार पर किया जाता है अगर आप इनका इस्तेमाल नियमित रूप से साप्ताहिक या दैनिक आधार पर करते हैं तो आपके बच्चे के अस्थमा पर पर्याप्त नियंत्रण है और उसे बचावकारी उपचार से फायदा पहुंचेगा .अस्थमा का दौरा पडने पर कई बच्चों को ओरल स्टेरॉयड भी लेना पड सकता है |

अस्थमा से बचाव
अस्थमा के उपचार का पहला लक्ष्य होता है आपके बच्चे को इसके लक्षणों से बचाकर रखना ताकि वह अपनी सामान्य गतिविधियों को आसानी के साथ कर सके अस्थमा से आपके बच्चे की सामान्य गतिविधियों में बाधा पैदा होनी चाहिए | अस्थमा को भडकानेवाले कारणों से बचने के साथ-साथ रोजाना बचावकारी औषधियां लेकर अस्थमा को दूर रखा जा सकता है इनमें स्टेरॉयडस शामिल है .जिन्हे रोजाना लेना चाहिए उन दिनों भी जब आपके बच्चे में अस्थमा के लक्षण न हो ये मीटर्ड डोज इन्हेलर्स और ड्राई पाउडर इन्हेलर के रूप में उपलब्द है वचावकारी अन्य औषधियों में दीर्घकालीन असरकारी ब्रॉन्कोडिलेटर्स शामिल है स्टेरॉयड तथा दीर्घकालीन असरकारी ब्रॉन्कोडिलेटर के सम्मिलित रूप में औषधि,एक इस्तेमाल में आसान ड्राई पाउडर इन्हेलर के तौर पर भी उपलब्द है यह सभी शक्तियों में उपलब्द है तथा आमतौर पर इसे दिन में दो बार एक इन्हेलेशन (सांस खीचकर अंदर लेते हुए)द्वारा लेना पडता है .बचावकारी औषधि का एक अन्य प्रकार क्यूकोट्राइन मॉडिफायर्स जैसे कि टेलिकास्ट (छोटे बच्चों के लिये ४मिग्रा तथा ५ मिग्रा टेब्लेट के रूप में उपलब्द हैं ) | अगर आपका बच्चा पहले से बचावकारी औषधि ले रहा है .मगर अब उसे नियमित रूप से राहतकारी औषधि लेने की भी जरूरत है | तो आपके बच्चे को कोई और बचावकारी औषधि या अपनी मौजूदा औषधियों की जयादा ऊंची खुराक दी सकती है उदाहरण के लिए अगर वह पहले से एसीफ्लो १००/५० ले रहा है तो उसकी खुराक को और बढाकर उसे २५०/५० दिया जा सकता है तथा / या उसके उपचार प्लान में टेलिकास्ट को भी शामिल किया जा सकता है |

अस्थमा पर निगरानी
अपने बच्चे के अस्थमा उपचार की निगरानी रखने का सबसे आसान तरीका यह है कि पहले यह गौर करें कि क्या वह इसके किन्ही लक्षणों से पीडित है अगर आपके बच्चे को खांसी नही हो रही है या खांसी लेने में कोई तकलीफ नही है तथा राहतकारी औषधि का भी कभी-कभार ही इस्तेमाल करता है तो इसका मतलब है कि उसका अस्थमा अच्छे नियंत्रण में है अगर वह अक्सर खांसता है खासतौर से रात के समय का कामकाज करते समय या अगर वह अपनी राहतकारी औषधियों को रोजाना या हर हफ्ते लेता है तो उसका अस्थमा संभवत: अच्छे नियंत्रण में नही है |


आपके बच्चे के ५-६ वर्ष के हो जाने पर उसके अस्थमा पर निगरानी रखने में पीक फ्लो से मदद मिल सकती है पीक फ्लो मीटर एक छोटा सा यंत्र है जो आपके बच्चे को इस पर फूंक मारने को कहा जाता है तथा इसनें उसको जो नंबर मिलता है उससे यह पता चलता है कि उसका अस्थमा काबू में है या तकलीफ देने की स्थिति में है पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट्स अन्य ऐसे उपाय हैं जो यह जानने में मदद कर सकते है कि क्या आपके बच्चे का अस्थमा काबू में है | इसे आमतौर पर एलर्जिस्ट या पल्मोनोलॉजिस्ट के क्लिनिक में ही किया जाता है |

अस्थमा उपचार कार्यक्रम
डॉक्टर द्वारा आपको उपलब्द उपचार या एक्शन प्लान आपके लिए एक ऐसा सुलभ संदर्भ है जिससे आपको यह जानने में मदद मिलती है कि कब कौन सी औषधियां लेनी है | अस्थमा उपचार कार्यक्रम में आमतौर पर आपके बच्चे की रोजाना की औषधियों का विवरण दिया गया होता है इसमें पर भी बताया गया होता है कि जब रोगी का पीक फ्लो नीचे गिर रहा हो तो क्या लेना है या जब अस्थमा के लक्षण उभर रहे हों तब क्या लिया जाए |

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डा. एस. के. अवस्थी (अस्थमा,सांस एवम क्षयरोग विशेषज्ञ)

e-mail: sk_awasthi@hotmail.com

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