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Posted on 13
July 07 आपाधापी व कोलाहल से परिपूर्ण
इस युग में उत्तेजना या बेचैनी की शिकायत एक आम बात है |
एक अध्ययन के अनुसार २० से ३४ फीसदी लोग इस शिकायत से
ग्रस्त है |
लक्षण - उत्तेजना बेचैनी की
इस शिकायत में व्यक्ति किसी भी काम को शुरू करने से पहले
ही घबराने लगता है | उसका दिल तेजी से धङकने लगता है,
हाथ-पैरों में थरथराहत होती है और पेट में हलचल महसूस होती
है | इस रोग का सीधा संबंध हमारे शरीर के तंत्रिका तंत्र
से होता है | उत्तेजना से संबंधित दो तरह की बीमारियां
प्रायः ज्यादातर लोगों में पाइ जाती है |
अज्ञात भय - इसे चिकित्सकीय
भाषा में 'पैनिक डिसोर्डर ' भी कहते हैं | इस मर्ज में रोगी
बिना किसी कारण के उलझन महसूस करने लगता है | मानो उसकी
सासें रुक जायेगी ,और दिल जोर से धङकने लगता है और उसे
घुटन सी महसूस होने लगती है | एसे रोगी भीङभाङ वाली जगह पर
नहीं जाते ,उन्हें लिफ्ट पर चङने में डर लगता है कि कहीं
लिफ्ट न गिर जाये |
इसी प्रकार की एक दूसरी समस्या को चिकित्सकीय भाषा में
सामान्य उत्तेजना गङबङी (जनरल एंग्जाइटी डिसोरडर) कहते हैं
| इस रोग में रोगी दिन भर घबङाता रहता है, वह मामूली आहट
से भी सहम जाता है, इस वजह से उसे नींद नहीं आती है और
उसका स्वाभाव चिङचिङा हो जाता है |
उपचार: इस
तरह की मानसिक बीमारियों के उपचार के लिये अब ' यू एस एफ
डीए एप्रूव्ड' (USFDA Approved) कई प्रभावशाली दवाएं
उपलब्ध हो चुकीं हैं | इन दबाओं के सेवन से १२ से १५
साप्ताह के अन्दर रोगी पूर्णतः स्वस्थ हो जाता है इसके साथ
ही रोगी को मनोचिकित्सकीय परामर्श भी दिया जाता
है |
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