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मोतिया बिंदु और मधुमेह

Posted on 12 July 07

हमारे जीवन में हमारी दिनचर्या की चिंताओं, कसरत की कमी, तथा उच्च कैलोरी युक्त भोजन इत्यादि कारणों से मधुमेह बीमारी प्रचुरता से व्याप्त हो चुकी है |  यहां तक कि मधुमेह को अब महामारी का दर्जा दिया जाने लगा है |

मोतिया बिंदु हमारे देश की प्रमुख नेत्र रोग चुनौती है जैसे मोतिया बिंदु कई प्रकार का होता है वैसे ही मधुमेह भी कई प्रकार का होता है दोनों बीमारी प्रायः बढती उम्र के साथ होने वाली बीमारियां है | तो यह विषय काबिले गौर है कि हम मोतिया बिंदु और मधुमेह के अन्योन्याश्रित संबंध को समझने का प्रयास करें|

मधुमेह का असर और मोतिया बिंदु - मधुमेह बीमारी की वजह से हमारे शरीर की कार्य करने की क्षमता (metabolism) प्रभावित हो जाती है| इससे हमारे नेत्रों के द्र्व्यों का मिश्रण गडबडा जाता है | यही गडबडी आंख के प्राक्रतिक लेंस को धुंधला कर देती है और मोतिया की बीमारी जल्दी हो जाती है|

मधुमेह और मोतिया बिदु की शल्य चिकित्सा - आम व्यक्ति की चिकित्सा और मदुमेह ग्रसित व्यक्ति की शल्य चिकित्सा में निम्नांकित विशेष अंतर होते है:
[१] मोतिया आपरेशन के पहले आपका Blood Sugar control होना चाहिए | यह control दवाइयां, आहार, कसरत, और इंजैक्शंन् द्वारा आपके फिजीशियन अथवा डाय़बिटीज विशेषज्ञ के संरक्षण में किया जाता है|
[२] Sugar control में प्रायः लोग बहुत ज्यादा समय बर्बाद करते हैं | अगर हम एक सम्यक व्यवहार करें तो Sugar को regular control में ज्यादा समय प्रायः नहीं लेता है |
[३] मदुमेह की वजह से नेत्रों में अन्य बीमारिया जैसे काला मोतिया ,पलकों का इन्फैक्शन. रेटिनोपैथी इत्यादि बीमारिया भी हो सकती हैं | अतः मोतिया आपरेशन से पहले नेत्रों की पूरी जाँच जिसमें रेटिना की जाँच भी शामिल है, अवश्य कर लेनी चहिए |
(४) मधुमेह के मरीजों को आपरेशन के बाद विशेष ख्याल रखना चाहिये | इनमें आपरेशन के पश्चात सूजन तथा इन्फैक्शन की संभावनाओं को निकटता से देखते रहना चाहिये |
(५) फेको विधि द्वारा किये गये आपरेशन सामान्य मैनुअल फेको अथवा आई ओ एल विधि द्वारा किये गये मोतियाबिन्दु आपरेशन से बेहतर होता है | इसमें आँख को कम चोट पहुचती है तथा इसी कारण फेको आपरेशन के पश्चात नजर प्राप्त की संभावना बेहतर होती है|
(६) मशीनीकृत फेको में छोटे छिद्र द्वारा आपरेशन किया जाता है | इसका सही फायदा तभी प्राप्त होता है जब कि आँख में फोल्डेबुल आई ओ एल (IOL) प्रत्यारोपित किया जाये |
(७) मधुमेह के मरीजों में मोतियाबिन्दु शल्य चिकित्सा एक सुरक्षित प्रक्रिया है | किन्तु इसे सुरक्षित रखने के लिये आवश्यक है कि हम सजग रहें | नेत्र सेवा विशेषज्ञ एवं अन्य डाक्टर की मदद से मधुमेह और मोतिया के दंश को आसानी से तोडा जा सकता है |

डा. मलय चतुर्वेदी, एम.एस. (नेत्र चिकित्सा)

e-mail: mach64@sify.com

 

 

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