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Posted on 14 July 07 शराब व तम्बाकू की तरह पेट्रोल या पेन्ट् थिनर जैसे
रासायनिक पदार्थो को सूंघने की लत भी अब शहरों में स्कूल
जाते किशोरों में अक्सर देखी जा सकती है यह लत सबसे अधिक
१०-२० वर्ष की आयु के किशोरों मे देखी जाती है आंकणो के
अनुशार शहरों में इस लत के शिकार किशोरों की संख्या १०
प्रतिशत तक है जानकारी के आभाव मै माता-पिता इसे अनदेखा कर
देते है और देखते ही देखते यह एक गम्भीर लत का रुप ले लेती
है ज्यादातर ये बच्चे घर मे ही आसानी से पाये जाने वाले
पदार्थ जैसे पेट्रोल ,नेल पाँलिश रिमूवर ,स्प्रे या थिनर
को एक शीशी या पालीथिन में भर कर या रुई या रुमाल मे
भिगोकर अपने साथ ही रखते हैं | शुरुआत् में बच्चे अपने इसे
शौकिया तौर पर कभी-कभी ही सूंघते है लेकिन धीरे-धीरे लत के
बढ जाने पर वे दिन मे कई बार गहरी सांस लेकर सूंघते है ऐसे
मे बच्चा इस के बिना रह नही पाता है और पढाई लिखाई व अन्य
महत्वपूर्ण् कार्य छोडकर इस काम में लगा रहता है | लक्षण्
(1) इस लत के शिकार किशोरों पर से एक खास तरह की गन्ध हमेशा आती रहती है |
(2) बच्चा हमेशा गुमसुम एंव चुपचाप रहता है |
(3) आंखे लाल होने तथा हमेशा जुखाम बनी रहना |
(4) ज्यादा उपयोग के कारण जुबान लड्खडाना कांपना व धुन्धला दिखाई देना
(5) समय से घर नही पँहुचना, और झूठ, बोलना, तथा चोरी करना |
(6) चिडचिडापन होना, अत्यधिक बहस करना गुस्सा आना ,मारपीट तोड फोड करना |
(7) समय पर इलाज के आभाव से बच्चो में आपराधिक प्रव्रत्ति जन्म ले लेती है |
कारण
(1) नशा का घर में आसानी से उपलब्ध होना |
(2) माता-पिता में इस लत की जानकारी न होना |
(3) पिता मे शराव व अन्य किसी नशे की लत होना |
इलाज
(1) बीमारी के बढ जाने के बाद सिर्फ सख्ती बरतने से या डाटने-धमकाने से ही रोगी लत नहीं
छोड पाता उल्टे आक्रामक हो जाता है |
(2) कुछ दवाओं की सहायता से एंव् मनोचिकित्सा से इस लत को आसानी से छोडा जा सकता है |
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