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July 07 मनोचिकित्सकीय शब्दावली में पजेशन सिंड्रोम
(Possession Syndrome) या पजेशन स्टेट्स
(Possession Satatus) का आशय एक ऐसी अवस्था
से है, जिसमे व्यक्ति कुछ समय के लिए अपना अस्तित्व व पहचान भुलाकर किसी म्रत
व्यक्ति हाव-भाव व उसकी पहचान को अपना लेता है कि जैसे मरीज के शरीर के अन्दर किसी
आत्मा ने प्रवेश कर लिया
हो | लक्षण
(1) पजेशन सिंड्रोम से ग्रस्त मरीज अपने परिवेश की
वास्तविकता को लेकर भ्रमित हो जाता है या फिर उन्है किसी
और रिश्ते के रुप में पहचानता है | जैसे वह अपने चाचा को
बेटा के रुप में संबोधित कर सकता है |
(2) रोगी की आबाज का बदल जाना और अपने शरीर में भारीपन
महसूस करना |
(3) शरीर व सिर इधर-उधर लहराना या भाग दौङ करना |
(4) मृत परिजनों के हाव भाव में बातें करना व अधिकार जताना
|
(5) ऐसे लक्षण अचानक ही प्रकट होते है और कुछ मिनटों व घंटों
से लेकर एक या दो दिन तक बने रह सकते हैं |
(6) रोगी अचानक खुद ही ठीक हो जाता है ठीक होने के बाद उसे
यह याद नहीं रहता कि उसके साथ क्या हुआ था और उसने क्या
हरकतें की थीं ?
कारण
मनोचिकित्सक इस तरह के मर्ज को समस्याओं व तनावों से निपटने
का एक विक्रत ढंग मानते है सामाजिक रुप से कमजिर व्यक्ति
जैसे विधवाएं, सौतेले बच्चे व बहुओं में यह रोग अधिक होता
है | ऐसे व्यक्ति अनेक सामाजिक व शारीरिक कष्टों से घिरे
रहते हैं, लेकिन किसी भी तरह इनसे निपटने में असक्षम होते
है या फिर उन्है अपने कष्टों को व्यक्त करने की अनुमति नहीं
होती |
इलाज
(1) ज्यादातर ऐसे रोगी झाड-फूंक के लिए तांत्रिक या ओझा
के पास ही ले जाए जाते है चूंकि यह रोग कुछ समय में खुद ही
ठीक हो जाता है, इसलिए परिजन यह मान लेते है कि यह मर्ज
झाड-फूंक से ठीक हो गया लेकिन यह रोग बार-बार होता है, पर
झाड-फूंक से ठीक नहीं होता |
मनोचिकित्सा के
दौरान इस रोग के उपचार के लिए स्थाई हल निकाले जाते है
हिप्नोसिस.के जरिए रोग के अचेतन मन और उसमें बसी पीङाऔ को
पहचाना जाता है और फिर इस के अनुरुप ही उसका इलाज किया जाता
है हिप्नोसिस के जरिए इस बात पर भी जोर दिया जाता है कि
रोगी अपनी दबी हुई भावनाओं को व्यक्त करे | मनोचिकित्सा के
तरह रोगी के परिजनों का भी सहयोग लिया जाता है इसके साथ ही
मरीज की उलझन व उदासी को दूर करने के लिए दवाओं का प्रयोग
किया जाता है | |