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Posted on 16
July 07 स्किजोफ्रेनिया एक ऐसा रोग है जिसमे रोगी की सोच भावन और उसके व्यवहार में गंभीर
रुप से विक्र्तियां पैदा हो जाती है इस मर्ज का मरीज वास्तविकता और कल्पनाओं के बीच
मे अन्तर करने की क्षमता खो देता है आंकडों के अनुशार देश मे एक करोड से अधिक पुरुष
व महिलायें इस रोग की चपेट में है |
लक्षण
(1) ऐसे रोगी काफी समय तक एक ही जगह बैठे रहते है और मन ही
मन बुदबुदाया करते हैं |
(2) इस मर्ज से ग्रस्त मरीज अक्सर बगैर किसी बात के हंसते
व रोते देखे जा सकते है |
(3) मरीज बिना किसी कारण के दुसरों पर शक करेने लगता है उसे
लगता है कि किसी ने उस पर जादू टोना कर दिया है |
(4) कभी-कभी रोगी अपना घर छोड कर चला जाता हैं | वह कई
महिनों तक घर नही लोटता |
भ्रांतियां
स्किजोफ्रेनिया के रोग एंव इसके इलाज के साथ अनेक
भ्रांतिंया जुडी है इन भ्रांतियों के चलते आधे से अधिक रोगी
सही इलाज से वंचित हैं |
(1) अक्सर रोगी के परिजन ऐसे रोगीयों को जादु-टोना करकाने
के लिए तांत्रिक या ओझा के पास ले जाते है लेकिन वास्तविकता
यह है कि रोग किसी भी .बुरी नजर. या ग्रह -दशा या किसी देवी
-देवता के प्रकोप से नही होता | मधुहमेह व उच्च रक्तचाप
जैसी बीमारीयों की तरह यह भी एक मर्ज है जो हमारे मस्तिष्क
में व्याप्त रसायनों (Nero-chemicals) की कमी के चलते होता
है |
(2) कभी-कभी परिजन इस रोग का कारण कामवासना की गर्मी को
मानते हैं इस कारण वे मरीज की शादी कर देते है इस रोग मे
कोई राहत नही मिलती है उल्टे समस्याएं और बढ जाती हैं |
(3) इलाज व दवाओं को लेकर भी इस रोग के बारे में भ्रांतियां
फैली हैं| कुछ लोग यह कहते सुने जाते है कि इस मर्ज में
नशीली दवाएं दी जाती हैं इस कारण रोगी को इन दवाओं की लत
पड जाती है लेकिन वास्तविकता यह है कि आज ऐसी दवाएं उपलब्ध
हैं, जिन्हैं रोगी सुबह खाकर अपने काम पर जा सकता है |
इलाज
(1) स्किजोफ्रेनिया के इलाज के लिए अनेक दवाइयां उपलब्द
हैं जिसके नियमित सेवन से रोगी सामान्य जिन्दगी जी सकता है
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(2) पूर्णरुप से ठीक होने के बाद दवाइयां एक निस्चित समय
तक दी जाती हैं| इन दवाओं के सेवन से मरीज को कोई लत नही
लगती |
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